Wednesday, 8 April 2020

तुम कौन हो ? - ०१


हे सुनो, कौन हो तुम ?

रेगिस्तान में सावन सी
अग्नि के जैसी पावन सी
सर्दी में खिली धूप सी
गर्मी में मिली छाँव सी


बारिश के बरसते बादल सी
आँखों में लगे काजल सी
पाओं में सजी पायल सी
नज़रें करती घायल सी


बताओ ना कौन हो तुम ?
लगती हो...


नदी के बहते पानी सी
परियों की कहानी सी
राजा की रानी सी
बिना जाने पहचानी सी


फूलों से बहती खुशबू सी
खिलती कलियों की बहारों सी
चंदा से निकलती चांदनी सी
सूरज से निकलती किरणों सी


मजनूं की लैला सी
रांझा की हीर सी
महिवाल की सोनी सी
फरहाद की सिरी सी


रसखान की चौपाई सी
कबीर के दोहों सी
प्रेमचंद की उपन्यासों सी
कालिदास के महाकाव्यों सी


हकीकत तो तुम हो नहीं
बताओ कौन हो तुम ?
'विद्रोही' के ख्वाब सी |

( ...अगली कड़ी में जारी)


- हिमांशु विद्रोही 

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