Thursday, 2 April 2020

मेरा भारत महान

(मेरे प्रिय कवी 'अवतार सिंह संधू' "पाश" से प्रेरित, यह कविता सन 2020 के शुरुआत में JNU के छात्रों पर चलायी गई लाठियों के विरोध में लिखी गई और तमाम क्रांतिकारी साथियों को समर्पित है | )

शब्द...महज़ कुछ अलफ़ाज़
जो कल भी बोले जा रहे थे
जो बोले जा रहे हैं आज
शब्द....महज़ कुछ अलफ़ाज़   !

शब्द जो फैलते हैं उन्माद
शब्द जो बताते हैं धर्म और जाति
शब्द जो बनाते हैं मंदिर और मस्जिद
शब्द जो कराते हैं दंगे और फसाद !


शब्द जो सींचते हैं नफरत की क्यारियां
शब्द जो चलवाते हैं लाठी और गोलियां
शब्द जो बनते  हैं उन्माद की बोलियां
शब्द जो बस बन गए हैं गालियां !


शब्द जिनसे बस बन रहे हैं गुलाम
शब्द जो भुला रहे हैं सबको मुकाम
जिनसे छोड़कर स्कूल और कॉलेज
पत्थर चला रहे हैं अब्दुल और राम !


शब्द जो जलाते हैं बस्तियां
शब्द जो जलाते हैं गुजरात
शब्द जो जलाते हैं दिल्ली
शब्द जो जलाते हैं गाड़ियां !

शब्द जो करवाते हैं बलात्कार
शब्द जो भुला रहे हैं संस्कार


शब्द......बस महज़ कुछ अलफ़ाज़
जो कल भी बोले जा रहे थे

जो बोले जा रहे हैं आज
यह तमाम शब्द जिन्हें 'विद्रोही' मानता नहीं अलफ़ाज़,


शब्द जिस दिन सिखायेंगे मोहब्बत
शब्द जिनसे मरेगा नहीं कोई किसान
शब्द जिनसे मरेगा नहीं कोई जवान
तब मैं भी कहूंगा 'मेरा भारत महान' !



- हिमांशु विद्रोही 

No comments:

Post a Comment

माथे पर बोसा

मेरे दायें हाथ में तुम्हारा बायां हाथ और मेरा बाया हाथ तुम्हारी कमर पर  इस तरह कसा हो कि  कसकर खींच सके तुम्हें इतना करीब कि तुम्हारी गर्म स...