यह कोई कविता नहीं हैं | यह भगत सिंह अपनी प्रेमिका से उस वक़्त कह रहे हैं ( जी हाँ भगत सिंह ! ....वही महान क्रांतिकारी जिस से कोई बेइंतहा मोहब्बत कर बैठी थी और करती भी क्यों नहीं आखिर भगत खुद ही कहा करते थे "पागल, प्रेमी और क्रांतिकारी एक ही मिट्टी के बने होते हैं "| उसी प्रेमिका को भगत समझा रहे हैं कि अगर दूसरा जन्म जैसा कुछ होता है तो मैं जरूर आऊंगा और तुम्हारी बाहों में अपना जीवन बिताऊंगा फ़िलहाल मैंने आज़ादी और क्रांति का रास्ता अख्तियार कर लिया है |
आबो हवा ज़हर है, चारों तरफ कहर है
आलम नहीं है ऐसा कि इश्क़ कर सकूँ मैं,
मैं तुझ पर मर तो जाता मेरी जां, पर क्या करूँ
हालात ऐसे ना हैं कि तुझ पे मर सकूँ मैं,
यह खून भीगी होली, यह सर कटी बैशाखी
ऐसे में तेरी चुनरी क्या सूंघ पाऊंगा मैं,
यह मांग उजड़ा टीका, यह सुन्न बैठी ममता
ऐसे में तेरे कंगन क्या चूम पाऊंगा मैं,
ईशा की ले गवाही, गौतम की ले गवाही,
हज़रत, कबीर, नानक के मन की ले गवाही
मीरा कसम है मुझको, राधा कसम है मुझको
है दूसरा जन्म, तो लेना जन्म है मुझको
उस दूसरे जन्म में, सिन्दूर लाऊंगा मैं
तेरी कसम कि डोला तेरा ठाऊँगा मैं !
- पियूष मिश्रा
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