तुम्हें लगता है कि तुम्हारा इंतजार महज मुझ तक है,
तुम्हें मालूम ही नहीं कि मेरे घर का हर एक कोनातुम्हारे इंतजार में है,
घर के दरवाजे का पायदान जिसे रौंदा जाता है आते जाते पैरों तले,
उसे तुम्हारे कदम पड़ने का इंतजार है,
मेरे कमरे में सालों से बुझी पड़ी मोमबत्ती को,
तुम्हारे हाथों रोशन होने का इंतजार है,
मेरे कमरे में दरवाजे के पीछे हैंगर पर टके कुर्ते के टूटे बटन को,
तुम्हारे हाथों लगाये जाने का इंतजार है,
मेरी पसंदीदा गुलाबी शर्ट को,
स्त्री होते तुम्हारे हाथों जलने का इंतजार है,
कमरे के कोने में लगे मकड़ी के जाले को,
तुम्हारे हाथों वजूद खत्म करने का इंतजार है,
बोतल से छलकती शराब की हर एक बूंद को,
तुम्हारा बोतल छीनने का इंतजार है,
जलती सिगरेट के धुएं को
मेरे लबों से आजाद हो,
खुली हवा में घुल जाने का इंतजार है,
तुम्हें लगता है तुम्हारा इंतजार बस मुझ तक है,
मेरे बिस्तर की बैडशीट पर पड़ी सलवटों को,
ठीक होने का इंतजार है,
मेरी काली पेंट को अपने साथ सफेद शर्ट पहनने का इंतजार है,
मेरे कमरे की बालकोनी में लगे मनी प्लांट के पौधे को,
नये पानी का इंतजार है,
इंतजार है मेरे घर के हर एक कोने को
तुम्हें लगता है कि तुम्हारा इंतजार बस मुझ तक है !
-हिमांशु विद्रोही
Sir bedsheet ki jgh Chaddar ki likha jaana chahiye...😌
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