पुनः खो जाना एक दूसरे की उलफ़त में
हर बार उसका मुझसे झगड़ा करना
मुझ से रूठ जाना,
मेरा उसको मनाना और
उसका बस चुप रह जाना |
उसका मुझे प्यार से पीटना
मेरा मुस्कुराते रहना और
उसका गुस्से में लाल हो जाना |
मेरा उसे बस ताकते रहना
उसका पलकें ऊपर न उठा पाना,
मेरा उसे अपलक देखते रहना और
उसका मजबूर हो पलकें उठाना |
मेरा उसको मनाना
उसके नयना जल से भर आना
दिल के संगीत का सुनाई पड़ना और
दोनों का चुप हो जाना |
खींच कर उसे पास अपने
मेरा उसे गले लगाना
उसका स्वयं को रोक नहीं पाना और
उसके नयनों से जल का बह निकलना |
लग जाना उसका मेरे सीने से और
बरबस मेरे नयनों से भी जल का बह जाना |
भूल कर दुनिया की हर एक बंदिश को
दोनों का एक-दूसरे के गले लग जाना |
यही सबसे बड़ी वजह बन जाना
निरंतर साथ-साथ चलते जाना
स्वयं को दूसरे से जुड़ा नहीं कर पाना और
पुनः खो जाना एक-दूसरे की 'उलफ़त' में |
फिर एक दिन उसका मुझसे रूठ जाना
फिर वही खेल शुरू हो जाना
उसका रूठना और मेरा मनाना
एक बार पुनः मुझे उस से और उसको मुझ से प्यार हो जाना |
- हिमांशु विद्रोही
No comments:
Post a Comment