अभी तो जख्म हरा-हरा है भर जायेगा...
जो होने लगी है हमसे मोहब्बत
तो हम से दूर रहना शुरू कर दो !
क्योंकि...
आज कहते हो बहुत प्यार है तुम से,
ठीक है, पर कल नहीं कह पाओगे !
हजारों तूफान आयेंगें इस इश्क के दरिया
में,
हम डूबने को तैयार हैं पर तुम नहीं डूब
पाओगे !
थामुंगा हाथ तुम्हारा हर मोड़ पर,
तुम भी थाम लोगे पर हाथ पकड़कर तुम चल नहीं
पाओगे !
बहुत डरावना होगा वह ‘उलफ़त’ का मंजर
माना तुम बेखोफ हो पर डरे बिना तुम रह नहीं
पाओगे !
दुश्मन है यह जमाना इश्क करने वालों का,
माना तुम मर मिटोगे पर ताउम्र तुम भी लड़
नहीं पाओगे !
आज मोहब्बत नई-नई है तो बहुत खुश हो तुम,
ठीक है पर कल नहीं रह पाओगे !
हम बेवफ़ा हरगिज न होंगें,
माना तुम भी नहीं होगे पर ताउम्र वफा तुम
नहीं कर पाओगे !
हम न जुदा होंगे कभी तुम से,
होगे तुम भी नहीं पर ताउम्र तुम साथ नहीं
रह पाओगे !
डर इस बात का नहीं कि तुझ से बिछड़कर मैं
कैसे जी पाउँगा,
फ़िक्र तो इस बात की है कि मुझ से बिछड़कर
तुम कैसे जी पाओगी !
अभी तो जख्म हरा-हरा है भर जायेगा,
इस मर्ज का इलाज अभी कर लो जो हो गयी देर
तो भर नहीं पाओगे !
- हिमांशु विद्रोही
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