Saturday, 5 August 2017

अभी तो जख्म हरा-हरा है


      अभी तो जख्म हरा-हरा है भर जायेगा...





जो होने लगी है हमसे मोहब्बत
तो हम से दूर रहना शुरू कर दो  !

क्योंकि...

आज कहते हो बहुत प्यार है तुम से,
ठीक है, पर कल नहीं कह  पाओगे !

हजारों तूफान आयेंगें इस इश्क के दरिया में,
हम डूबने को तैयार हैं पर तुम नहीं डूब पाओगे !

थामुंगा हाथ तुम्हारा हर मोड़ पर,
तुम भी थाम लोगे पर हाथ पकड़कर तुम चल नहीं पाओगे !

बहुत डरावना होगा वह ‘उलफ़त’ का मंजर
माना तुम बेखोफ हो पर डरे बिना तुम रह नहीं पाओगे !

दुश्मन है यह जमाना इश्क करने वालों का,
माना तुम मर मिटोगे पर ताउम्र तुम भी लड़ नहीं पाओगे !

आज मोहब्बत नई-नई है तो बहुत खुश हो तुम,
ठीक है पर कल नहीं रह पाओगे !

हम बेवफ़ा हरगिज न होंगें,
माना तुम भी नहीं होगे पर ताउम्र वफा तुम नहीं कर पाओगे !
हम न जुदा होंगे कभी  तुम से,
होगे तुम भी नहीं पर ताउम्र तुम साथ नहीं रह पाओगे !

डर इस बात का नहीं कि तुझ से बिछड़कर मैं कैसे जी पाउँगा,
फ़िक्र तो इस बात की है कि मुझ से बिछड़कर तुम कैसे जी पाओगी !

अभी तो जख्म हरा-हरा है भर जायेगा,
इस मर्ज का इलाज अभी कर लो जो हो गयी देर तो भर नहीं पाओगे !


- हिमांशु विद्रोही 



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