Thursday, 18 January 2018

इंतजार तो उसे भी था...

            

 इंतज़ार तो उसे भी था... 

इंतज़ार तो उसे भी था किसी के लौटने का,
शायद किसी अपने का ही !

कोई तो है जिसकी सुनहरी यादों के साये में वो पूरा दिन गुजर देता है !

देखा है मैंने उसे बहुत बार.
घंटों यूँ ही अकेले बैठे हुये !

शायद कुछ खो गया है उसका,
वर्ना यूँ ही कोई,
पागलों की तरह दीवारों से बातें नहीं किया करता !

वो उन्मुक्त गगन का आज़ाद परिंदा,
ना जाने कोनसे जाल में फंस गया है !

कुछ तो है जो उसके परों को कुत्तर चुका है,
वर्ना यूँ ही कोई,
अपनी आज़ादी जाया नहीं  करता !

ऐसा नहीं है कि मैंने जानना नहीं चाहा,
पर उसने कभी बताया नहीं !

हाँ यह मैं यकीन से कह सकता हूँ कि
किसी का तो इंतज़ार है उसे !
वर्ना यूँ ही कोई 
सुनसान रातों में खाली पड़ी बेजान सड़कों पर अकेले नहीं घुमा करता !

मुझे मालूम तो नहीं कि उस शख्स विशेष में विशेष क्या है,
 पर इतना यकीन से कह सकता हूँ कि वह बहुत अलग है इस दुनिया से !
शायद दुनिया के लिये वह एक इंसान मात्र है पर उसकी दुनिया है वह !

बहुत लोगों से सुना है उस वक़्त के  बारे में जब वह खुश रहा करता था !
बहुत बातें भी किया करता था !
ठीक वैसे ही जैसे अन्य लोग !

उम्मीद तो नहीं,पर आशा करता हूँ,
कभी मैं भी उस शख्स को इसमें देख सकूँ,
जिसकी लोग बात किया करते हैं !


हिमांशु विद्रोही 

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