इंतज़ार तो उसे भी था...
इंतज़ार तो उसे भी था किसी के लौटने का,
शायद किसी अपने का ही !
कोई तो है जिसकी सुनहरी यादों के साये में वो पूरा दिन गुजर देता है !
देखा है मैंने उसे बहुत बार.
घंटों यूँ ही अकेले बैठे हुये !
शायद कुछ खो गया है उसका,
वर्ना यूँ ही कोई,
पागलों की तरह दीवारों से बातें नहीं किया करता !
वो उन्मुक्त गगन का आज़ाद परिंदा,
ना जाने कोनसे जाल में फंस गया है !
कुछ तो है जो उसके परों को कुत्तर चुका है,
वर्ना यूँ ही कोई,
अपनी आज़ादी जाया नहीं करता !
ऐसा नहीं है कि मैंने जानना नहीं चाहा,
पर उसने कभी बताया नहीं !
हाँ यह मैं यकीन से कह सकता हूँ कि
किसी का तो इंतज़ार है उसे !
वर्ना यूँ ही कोई
सुनसान रातों में खाली पड़ी बेजान सड़कों पर अकेले नहीं घुमा करता !
मुझे मालूम तो नहीं कि उस शख्स विशेष में विशेष क्या है,
पर इतना यकीन से कह सकता हूँ कि वह बहुत अलग है इस दुनिया से !
शायद दुनिया के लिये वह एक इंसान मात्र है पर उसकी दुनिया है वह !
बहुत लोगों से सुना है उस वक़्त के बारे में जब वह खुश रहा करता था !
बहुत बातें भी किया करता था !
ठीक वैसे ही जैसे अन्य लोग !
उम्मीद तो नहीं,पर आशा करता हूँ,
कभी मैं भी उस शख्स को इसमें देख सकूँ,
जिसकी लोग बात किया करते हैं !
- हिमांशु विद्रोही
Chha Gaya bhai
ReplyDeletebahut hi Sundar likha
Thank You so Much Dear!
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