... तो गलत हो तुम !
रोज तुम्हें देखता हूँ, पास आता हूँ |
अनदेखा कर मुझे, दूर चली जाती हो,
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ दूर चली जाओगी
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
सामने मेरे आ जाने पर |
यूँ बोहें चढ़ा, सहेलियों संग उपहास उड़ाते हुये निकल जाती हो |
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ उपहास उड़ा चली जाओगी,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
मेरे इज़हार करने पर,
बड़ी बेदर्दी से नकार देती हो
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ ही नकारती रहोगी,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
मेरे तुम्हें बार-बार रीझाने की कोशिश करना,
रीझने की बजाय चिढ़ जाती हो
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ चिढ़कर चली जाओगी,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
हर बार मेरा हाँ की उम्मीद से आना,
हर बार तुमसे ना का जवाब पाना
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ ही ना कहती रही,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
मेरे कुछ कहने की कोशिश करना
और तुम्हारा अनसुना कर देना
और अनसुना कर सोचती हो, यूँ ही अनसुना करती रही,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
मेरे मिलने की कोशिश करना
मुझ से न मिलकर, किसी और संग घूमती हो
और दूर जाकर सोचती हो, यूँ किसी और संग घूमती रहोगी,
तो मोहब्बत करना छोड़ दूंगा, ...तो गलत हो तुम !
- हिमांशु विद्रोही
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