Friday, 27 April 2018

हाल ही में हुए बलात्कार की घटनाओं पर मेरी एक छोटी सी रचना !


... तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला !


तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला
कभी ग्लानि का अहसास मत करना
तुम्हें फक्र होना चाहिए स्वयं पर
कि मैं तुम्हारी आभारी हूँ !
मैं खुशकिस्मत हूँ कि तुमने मुझे मार डाला
कुछ पल की असहाय पीड़ा,
और फिर हमेशा के लिय शांत हो गई !
मैं तुम्हारा आभार व्यक्त करती हूँ
कि बचा लिया तुमने मुझे
उन तमाम सजाओं से
जो आने वाले वक़्त में
मुझे इस सभ्य समाज से मिलने वाली थीं !
तुम्हें मिले उस भौतिक सुख से तो मैं अनभिज्ञ हूँ
पर मैं तुम्हारी आभारी हूँ
कि तुमने मुझे मार डाला !
कुछ गलत नहीं किया तुमने
गुनाह कर देते मुझे जिन्दा छोड़कर
अभी तो उम्र ही क्या थी मेरी, मात्र 8 महीने
महज उतने ही दिन,
जितने तुम अँगुलियों पर गिन सको !
अगर जिन्दा रहती तो यह उम्र 50 60 या फिर 100 साल भी हो सकती थी !
मैं आभारी हूँ कि तुमने बचा लिया मुझे
उन तमाम कठिनाइयों से
जिन्हें सहन करते-करते
मैं जिन्दा रहकर भी मृत ही रहती !
तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला
तुमने मुझे अभी मारकर
बचा लिया मुझे
उन तमाम हवस भरी नज़रों से
जो मेरे जवां होने पर
मुझे घूरतीं रहती, हर एक गली, चौराहे और मोड़ पर
ठीक उस भूखे भेड़िय की तरह, जिसने काफी दिन से कुछ खाया न हो !
तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला
तुमने मारकर मुझे बचा लिया
उन सारी पीड़ाओं से
जो देश की हर औरत केवल इसलिय सहन करती है
कि वो औरत है !
तुमने बचाया है मुझे
अपने ही प्रेमी की रुसवाई से, अपने ही पति की मार से !
अपनी ही सास के तानों से, अपने ही पडोसी की हवसी नज़रों से !
तुमने बचाया है मुझे, अपने ही घर में असुरक्षित महसूस करने से !
यह तो केवल वो वेदनाएं हैं जो मैं बता सकती हूँ किसी से
और भी ना जाने कितनी अनगिनत पीड़ायें,
मैं झेलती दिन रात जो किसी से बता भी न पाती
तुमने बचाया है मुझे उन तमाम पीड़ाओं से !
तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला !
तुमने अच्छा ही किया जो मुझे मार डाला !  
=> हिमांशु विद्रोही 

प्रकाशित:   
'The Critical Mirror' में !

No comments:

Post a Comment

माथे पर बोसा

मेरे दायें हाथ में तुम्हारा बायां हाथ और मेरा बाया हाथ तुम्हारी कमर पर  इस तरह कसा हो कि  कसकर खींच सके तुम्हें इतना करीब कि तुम्हारी गर्म स...