(बहुत दिनों बाद आज मोहब्बत पर कुछ लिखा है)
मैं तुमसे मोहब्बत कर रहा हूँ |
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
तोड़ रहा हूँ वो सारे
वादे,
जो किये थे मैंने खुद
से
बुन रहा हूँ मैं वो
सारे ख्वाब फिर से
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
चलती हैं जब हवायें
बरसती हैं जब बूंदें
चमकता है जब चाँद
टिमटिमाते हैं जब
तारे
और निकलता है जब सूरज
बस तुम्हारी ही याद
है आती
हाँ तोड़ रहा हूँ मैं
वो सारे वादे
जो किये थे मैंने खुद
से
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
हाँ किया था वादा
मैंने खुद से
अब ना दूंगा दिल किसी
को
ना होगा अब यकीन किसी
पे
हाँ तोड़ तरह हूँ मैं
सारे वादे
जो किये थे मैंने खुद
से
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
बुन रहा हूँ कुछ सपने
आने वाले कल के
पता है ! तुम हो हर एक सपने में
जो देखें हैं मैंने
आने वाले कल के
जाने क्यों ये जज्बात
घड़ रहा हूँ
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
उड़ रहीं मेरी रातों
की नींदे
और गायब है दिन का
चैन
बस याद तुम्हें हर पल
कर रहा हूँ
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
रात कटती नहीं,
कट जाये
तो दिन गुजरता नहीं,
गुजर जाये
तो शाम खूबसूरत लगती
नहीं
सिवा तुम्हारे अब
मेरी नज़र किसी को खोजती नहीं
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
रात में याद आती हैं
तुम्हारी सब बातें
तुम्हारे किस्से और
तुम्हरी छुअन
सो नहीं पाता हूँ
सारी रात और
सुबह तुम्हारे 'गुड मॉर्निंग' के मैसेज का इंतज़ार करता हूँ
उठकर फिर बुनने लगता
हूँ सपने उस सुबह के
जिसमें हम साथ
जागेंगे
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
फिर दिन भर वही शाम
का इंतज़ार
और शाम को रात का रात
को वो ही तुम्हरी यादें और
फिर सुबह,
सुबह वही 'गुड मॉर्निंग' के मैसेज का इंतज़ार और
फिर मेरा वही सपने
बुनना
बस रोज यूँ ही रात से
सुबह,
सुबह से शाम और शाम से रात और
रात से फिर सुबह के
इस बेरुखे सफर में याद तुम्हें कर रहा हूँ
मैं जानता हूँ कि मैं
गलत कर रहा हूँ
पर मैं तुमसे मोहब्बत
कर रहा हूँ |
- हिमांशु विद्रोही
gjb guru ji
ReplyDelete