Thursday, 26 March 2020

वह और उसकी मोहब्बत

"जीया हो जिसके साथ जींदगी को,
उस से बिछड़ना आसान नहीं होता | 
और रही होंगीं उनकी भी कुछ मजबूरियाँ मोहब्बत से भी बढ़कर,
वर्ना यूँ ही कोई बेवफ़ा नहीं होता !"

(...मेरी ख़ास  मोहब्बत  के नाम )

कुछ इस कदर यकीं था उसे मेरी मोहब्बत पर,
भरी हसीनाओं की महफ़िल में अकेला छोड़ जाया करती थी | 


उसे ज़रा भी ख़ौफ़ न था मेरी मौत का,
हर बात पर कसम मेरी ही खाया करती थी | 


कुछ यूँ बेहिसाब फ़िक्र थी उसे मेरी,
एक बार में फोन न उठाने पर बुरा मान जाया करती थी | 


यूँ तो रूठ जाया करती थी वह वह छोटी-छोटी बातों पर,
पर मेरे प्यार  मनाने पर मान जाया करती थी | 


हक़ वह इस कदर जताया करती थी मुझ पर,
भरी सभा में भी मुझे जान कहकर बुलाया करती थी | 


और मोहब्बत वह कुछ इस तरह निभाया करती थी,
जब भी बिछड़ती थी मुझ से, अपना एक दुप्पटा छोड़ जाया करती थी | 

- हिमांशु विद्रोही 

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