Friday, 5 May 2023

भूख का मजहब नहीं होता

कल मैं एक शहर गया था,

शहर जिसे कहते हैं सब दिल्ली 

देश की राजधानी दिल्ली  |

देश...

अरे वही भारत महान

विश्व गुरु भारत,

बड़ी चौड़ी ऊपरी पुलिये वाली सडकों पर 

सड़क किनारे रखा होता है,

एक हरे रंग का डिब्बा |

जिसे अंग्रेजी में कहते हैं डस्टबिन  |


उसी डस्टबिन के कचरे में 

ढूंढरहे थे दो हाथ 

कुछ ऐसा 

जिस से मिल जाये भोजन दो जून का |

एक हाथ का नाम था हरपाल,

दूजा था रहमान

था देखकर "विद्रोही" हैरान 

पूछा तो समझ आया

भूख का कोई मजहब नहीं होता 



- हिमांशु विद्रोही 

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