Saturday, 6 May 2023

तुम्हारी चूड़ियों की ख़नक मेरे कान में पड़ रही है

केवल मेरी नहीं, मोहब्बत वक़्त की जरुरत है,

यह दुनिया नफ़रत की आग में जल रही है। 


मोहब्बत कर लो तुम भी किसी से,

तुम्हें भी मोहब्बत की जरुरत लग रही है। 


गुजारनी है मुझे तुम्हारे बग़ैर जिन्दगी,

मुझे तो यह कोई नामुमकिन पहेली लग रही है।


मैंने दुनिया मान लिया है तुम्हें,

और तुम्हें यह कोई दिल्लगी लग रही है। 


काम में ख़लल पड़ता है मेरे, इन्हें उतारकर रख दो,

तुम्हारी चूड़ियों की ख़नक मेरे कान में पड़ रही है। 


तुम्हें लगता है, बहुत दूर हो तुम मुझसे,

तुम्हारी धड़कन तक तो सुनाई पड़ रही है। 


यह दुनिया इतनी भी अच्छी नहीं,

जीतनी अच्छी तुम्हें तुम्हें लग रही है। 


अपने लबों से चूम दो लब मेरे,

इस "विद्रोही" को हर चीज़ कड़वी लग रही है। 


- हिमांशु विद्रोही 




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