हे ! प्रेमिकाओं को पत्र लिखने वाले प्रेमियों
इश्क़ पर गज़लें लिखने वाले आशिकों
श्रृंगार पर कविता लिखने वाले कवियों
सुनो...
तोड़ दो अपनी कलम और
फाड़ दो कोरा कागज
तुम्हारी स्याही बांझ हो जाये
जो एक शब्द भी पैदा ना कर पाये
अगर लिख नहीं सकते तुम
संसद के सामने लुटती बहनों की इज्जत
लोकतंत्र के मंदिर में लोक पर भारी तंत्र
बेआबरू हो चुकी सत्ता की तानाशाही
बिक चुकी मिडिया का ज़हर
गंगा में फेंकें जा रहे मेडल
जलते हुए रोम में बांसुरी बजाते निरो
की लापरवाही, बेहयाई और
लुटते हिंदुस्तान की आबरू
हे ! प्रेमिकाओं को प्रेम पत्र लिखने वाले प्रेमियों
तुम्हें मोहब्बत लफ्ज़ लिखने का कोई अधिकार नहीं
तोड़ डालो अपनी कलम और
फाड़कर अपनी डायरी के पन्ने
जाओ जाकर अल्लाह और राम का जाप करो
- हिमांशु विद्रोही
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