आ एक नया मुल्क तामीर करें जिसमें
थोड़ा हिंदू, थोड़ा मुसलमान हो
सिख, इसाई और बौद्ध भी हों
सर्वोपरि बस इंसान हो !
तेरा थोड़ा भारत, मेरा थोड़ा पाकिस्तान हो
टूटे शरहद, मिटें दूरियाँ, दिलों में सबके प्यार हो
थोड़ा तेरा थोड़ा मेरा, मुक्कमल हिंदुस्तान हो !
थोड़ा मेरा लाहौर, तेरी भी थोड़ी दिल्ली हो
तुम आओ जयपुर कभी, मेरी थी थोड़ी कराची हो
थोड़ी मेरी रावलपिंडी, तेरा भी थोड़ा अहमदाबाद हो
तु भी घुमे लखनऊ, मेरा भी थोड़ा इस्लामाबाद हो
पटना तेरा, रांची तेरी, तेरा जैसलमेर हो,
गुड़गांव तेरा, अंबाला तेरा, तेरा भी हैदराबाद हो
मैं भी घुमूं मुलतान, देखूँ मैं पेशावर,
क्वेटा देखूँ, देखूँ गुजरेंवाला, मेरा भी फैसलाबाद हो
टूटे शरहद, मिटें दूरियाँ, दिलों में सबके प्यार हो
थोड़ा तेरा थोड़ा मेरा, मुक्कमल हिंदुस्तान हो !
मुझे मिले सरगोधा में बैठी मेरी मोहब्बत
तुझे भी तेरा अमृतसर वाला प्यार मिले
आ एक नया मुल्क तामीर करें ।
- हिमांशु विद्रोही
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