Sunday, 22 May 2022

तुम्हें पाना ही तो इश्क़ नहीं है !

 तुम्हें पाना ही तो इश्क़ नहीं है !

तुम्हारा इंतजार भी इश्क़ है,
इश्क़ है बिती बातें,
इश्क़ हैं यह हिज्र की रातें,
गज़ल के किसी शेर में तुम्हें खोजना भी इश्क़ है,
इश्क़ है कवि की कल्पना में तुम्हें देखना,
इश्क़ है मेरी डायरी में लिखी पंक्ति में तुम्हारा नाम
इंबोक्स में पड़ा पुराना गुडमॉर्निंग का मैसेज भी इश्क़ है,
इश्क़ है संदेश के साथ भेजी तुम्हारी वह इस्माइल वाली इमोजी,
इश्क़ है रोज सुबह सबसे पहले तुम्हारा मैसेज चैक करना,
जो बुने थे ख्वाब साथ हमने वह भी इश्क़ है,
इश्क़ है सिगरेट का धूंआ भी,
इश्क़ है शराब का नशा भी,
दिल की हर एक धड़कन भी इश्क़ है,
इश्क़ है सांसों का चलना भी,
इश्क़ है पानी, हवा भी इश्क़ है,
तुम्हें पाना ही तो इश्क़ नहीं !
तुम्हारा इंतजार भी इश्क़ है !
- तुम्हारे इंतजार में तुम्हारा 'विद्रोही

2 comments:

  1. आपका कविता बहुत ही रोमांटिक होते है।

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